भारत-भूटान के साथ अपनी सीमा के संबंध में 'बलप्रयोग की रणनीति' अपना रहा है चीन : पेंटागन

वॉशिंगटन:

अमेरिकी डिफेंस हेडक्वार्टर पेंटागन (Pentagon) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में दावा किया चीन दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में क्षेत्रीय और समुद्री दावों के साथ-साथ भारत और भूटान के साथ अपनी सीमा के संबंध में जबरदस्त रणनीति का उपयोग कर रहा है.  चीन दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर दोनों में काफी उत्तेजक रूप से लड़े गए क्षेत्रीय विवादों में लिप्त है. बीजिंग ने कई द्वीपों का निर्माण और सैन्यीकरण किया है और क्षेत्र में इसे नियंत्रित करता है.

यह दोनों क्षेत्रों को खनिज, तेल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध बताए गए हैं और यह वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं. चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है. वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इस क्षेत्र में अपना-अपना दावा करते है.

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पेंटागन ने अमेरिकी संसद में चीन पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा. “चीन के नेता अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए सशस्त्र संघर्ष की रणनीति का उपयोग करते हैं. चीन संयुक्त राज्य अमेरिका, उसके सहयोगियों और भागीदारों, या इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के अन्य लोगों के साथ सशस्त्र संघर्ष भड़काने की दहलीज से नीचे गिरने के लिए अपनी जबरदस्ती गतिविधियों को लगातार जारी रखता है, “

चीन तेजी से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य और आर्थिक प्रभाव का विस्तार कर रहा है, जिससे इस क्षेत्र के विभिन्न देशों और उससे आगे के देशों में चिंता बढ़ रही है.

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”सैन्य और सुरक्षा विकास में शामिल पीपुल्स रिपब्लिक चाइना 2020” शीर्षक से जारी की गई रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा है कि”ये रणनीति विशेष रूप से दक्षिण और पूर्वी चीन सागरों के अलावा भारत और भूटान के साथ इसकी सीमा पर चीन द्वारा अपने क्षेत्रीय और समुद्री दावों को आगे बढ़ाने में स्पष्ट हैं.”

चीन परमाणु हथियारों के भंडार को बढ़ाने की योजना बना रहा : पेंटागन

चीन ने इस दशक में परमाणु हथियारों के भंडार को संभावित तौर पर दोगुना करने और ऐसे बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार करने की योजना बनाई है जिनकी पहुंच अमेरिका तक हो. ”पेंटागन” ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह दावा किया.

दावा किया गया कि ऐसा इजाफा करने के बाद भी चीन की परमाणु शक्ति अमेरिका के मुकाबले काफी पीछे रहेगी, जिसके पास करीब 3,800 परमाणु हथियार सक्रिय स्थिति में हैं और बाकी अन्य ‘रिजर्व’में हैं.

अमेरिका के विपरीत, चीन के पास कोई परमाणु वायुसेना नहीं है लेकिन रिपोर्ट में कहा गया कि इस अंतर को एक परमाणु वायु-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करके भरा जा सकता है. अमेरिकी प्रशासन ने चीन से आग्रह करता रहा है कि वह रणनीतिक परमाणु हथियारों को सीमित करने के लिए तीन-तरफा समझौते पर बातचीत करने में अमेरिका और रूस के साथ शामिल हो, लेकिन चीन ने इससे इंकार कर दिया है. (इनपुट एजेंसी भाषा से भी)

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