बांग्लादेश में प्रणब मुखर्जी की याद में एक दिवसीय राजकीय शोक

भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो).

ढाका:

बांग्लादेश में बुधवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सम्मान में राजकीय शोक रखा गया. इस दौरान 1971 के मुक्ति संग्राम और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में मुखर्जी के ””उत्कृष्ट और अविस्मरणीय”” योगदान को याद किया गया. बांग्लादेश में बुधवार को सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी, स्वायत्त तथा निजी संस्थानों और विदेश में बांग्लादेश के मिशनों में राष्ट्रध्वज को शोक स्वरूप आधा झुका हुआ रखा गया.

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मुखर्जी (84) का 21 दिन तक विभिन्न बीमारियों से जूझने के बाद सोमवार को नयी दिल्ली में निधन हो गया था. मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था. बांग्लादेश सरकार ने देश के ””सच्चे मित्र”” मुखर्जी के निधन पर मंगलवार के एक दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की थी. सरकार ने एक बयान में विभिन्न धर्मों के धार्मिक स्थलों पर मुखर्जी के लिये विशेष प्रार्थनाएं आयोजित करने का आग्रह किया है.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने भारतीय समकक्ष नरेन्द्र मोदी को भेजे गए पत्र में कहा कि मुखर्जी को एक प्रसिद्ध विद्वान और भारत के राजनेता तथा दक्षिण एशिया के अति सम्मानित नेता के रूप में हमेशा याद किया जाता रहेगा. उन्होंने कहा कि भारत के लोगों के कल्याण के लिए ”भारत रत्न” मुखर्जी के अथक परिश्रम से न केवल भारत बल्कि क्षेत्र के दूसरे देशों के भावी पीढ़ी के नेताओं को प्रेरणा मिलेगी.

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हसीना ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए उन्हें एक ””सच्चा मित्र”” बताया और कहा कि ””बांग्लादेश के लोग उन्हें बहुत प्रेम करते थे और सम्मान देते थे.”” हसीना ने कहा कि 1975 में जब उनके पिता तथा बांग्लादेश के संस्थापक बंग बंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद उनके परिवार के अधिकांश सदस्यों को भारत में शरण लेनी पड़ी, तो मुखर्जी ने हमेशा उनकी मदद की.

 

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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